(Verse 1)
क्यों रुका है, क्यों डरा है, ज़रा खुद को पहचान ले
रास्तों पे धूल है गर, कदमों में तू जान ले
तेरी मंज़िल आसमाँ है, ज़मीं से ना बंधा रह
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जहाज़ तब तक नहीं डूबता,
जब तक उसमें कोई सुराख न हो,
इंसान भी तब तक मजबूत रहता है,
जब तक वो खुद को बेपर्दा न हो।
हर मुस्कान के पीछे एक कहान read more >>
यूं तो जिंदगी ने मारी है मुझे ठोकरें हजार,
हर बार गिरा ,संभला ,फिर से उठा हूं मैं।
हर बार फिर से लड़ा हूं मैं।
यूं तो जिंदगी ने मारी है म� read more >>
"मायका".....✍️
"मुझे कभी-कभी ऐसा लगता है,जैसे मर्दो का वास्तविकता में कोई घर नहीं होता,वो जहाँ पहुँचता है,वहाँ घर बनाता है,मगर औरतों का वाप� read more >>