ये उम्र भी गुजर रही हैं,
अब तो हम किसी से कुछ कह भी नहीं सकते.......!!
मर गई हैं ख्वाहिशें सारी,
अब तो खुद को ज़िंदा कर भी नहीं सकते..,....!!!
सांसे ह read more >>
"रूहानियत के लिए",
वो नूर (ईश्वर) मेरे भीतर है, मैं (अहं) मानती नहीं है
रूह रोज़ अपने रब के सजदे से चूकती है।
इश्क खुदा की जात है इश्क कि ड� read more >>