भगत सिंह आज अगर हमें देखते होंगे,
हमें देखकर वह यही सोचते होंगे,
क्या हो गई है मेरे देश की हालत ?
क्यों फैली है हर ओर जेहालत?
बट गया है मु read more >>
अंत नहीं यह एक नई शुरुआत है,
अनादि से यही अंत का रिवाज है।
बेशक एक राह का अंत हुआ है,
पर आगे राह अनंत है अथाह है।
जैसे सागर में धारा का न� read more >>