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भगत सिंह आज अगर हमें देखते होंगे, हमें देखकर वह यही सोचते होंगे, क्या हो गई है मेरे देश की हालत ? क्यों फैली है हर ओर जेहालत? बट गया है मु read more >>
मैं भी सोचता था किसी की याद में ताजमहल बनाऊं, पर क्या करूं मुमताज मिलती ही नहीं। 1 दिन किस्मत खुली, मुमताज मिली, अब सोचता हूं ताजमहल बन read more >>
ना हिंदू खतरे में है , ना खतरे में है मुसलमान। खतरे में है आज सारा हिंदुस्तान। हिंदू मुस्लिम को मारे या मुस्लिम मारे हिंदू को, मरता है read more >>
तुम ज़िन्दगी से चली गई — फिर ये ख़लिश थमी क्यों नहीं, अश्क रुक गये हैं मगर साँस रुकी क्यों नहीं। दिल को यूँ बिखेर गई वो बिना शोर के, आ� read more >>
કઠિન પથ પર અડગ ડગલાં ભરીને જોઈ લે તું પણ, મુસીબતની નજર સાથે નજર મિલાવી લે તું પણ. ​નથી મંજિલ નસીબોના કોઈ પાનાં પર લખાયેલી, લખાય છે એ પર� read more >>
भरी रही तेरी इफ्तार की थाली, पर जिसकी थाली रह गई थी खाली। उनकी भी फिक्र तुम कर लेना। अल्लाह की नेमत है तुझ पर भारी, कर ली है तूने पूरी ई read more >>
अपने लिए तो जीते हैं सब, पर दूसरों के लिए जीने का मजा कुछ और है। अपनी जुबान से तो हंसते हैं सारे, पर दूसरों की हंसी बन जाने का मजा कुछ और read more >>
ભલે બદલાય આ દુનિયા, જૂની વાતો નથી ભૂલવી, ગુજરાતી સાહિત્યની મીઠી એ યાદો નથી ભૂલવી. ​હશે તડકો ભલે આધુનિકતાનો ચારે બાજુ પણ, કવિઓના હૃદયન read more >>
अंत नहीं यह एक नई शुरुआत है, अनादि से यही अंत का रिवाज है। बेशक एक राह का अंत हुआ है, पर आगे राह अनंत है अथाह है। जैसे सागर में धारा का न� read more >>
નથી પૂજા, નથી અર્ચના, ફક્ત માણસ થવું અઘરું છે, બનીને દર્દ કોઈનું, કોઈનાં આંસુ લૂછવું અઘરું છે. ​મહેલ બાંધીને બેઠા છે અહીં લાખો યુગોથી � read more >>
!तुम वही हो! मेरे लिए तुम वही हो, मेरी प्रत्येक प्रभात का निःशब्द सुकून। मेरी संध्या की थमी हुई थकान का विश्राम, और मेरी रात्रि के एका� read more >>
बेशक चांद तारे तोड़ लाना मुमकिन नहीं है, पर हम कोशिश ही ना करें यह मुनासिब नहीं है।। read more >>
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