"वाह... ओ रब्बा...
एक तुझे अपना माना था...
तू भी लोगों वाली कर गया...
एक तुझे सारी बातें बताई थीं...
और तू भी पल्ला झाड़ गया...
वाह ओ रब्बा...
तू भी ल read more >>
माँ की ख़ुशी कोई बाज़ार की चीज़ नहीं,
वो तो दिल के किसी कोने में रखी परछाई है,
जिसे छूना तो आसान नहीं,
पर महसूस हर सांस में की जाती है।
स� read more >>