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आज के प्राणी की जरूरतें भी बड़ी। तमन्नाओं का संसार ही बड़ा, लेकिन सकुन एक पल भी नहीं। लाख से करौडपति ही बना, लेकिन कमजोरी भी वही; कि दौ� read more >>
"लिखना मेरी आदत है, और कम बोलना मेरी पहचान। मैं चाय के कप में संभाल लूँ, ताने-मेने और अपमान!" ☕🔥 — वीरपाल भुल्लर read more >>
अतिशोक क्यों ? इस दुनिया का दस्तूर है ये कुछ फूल नहीं मुरझाएंगे कुछ फूल न तोड़े जाएंगे नए फूल फिर खिलेंगे कैसे... इस दुनिया का दस्तूर � read more >>
लाशों की गिनती गुनाहों के साथ नहीं होती। हां, गुनाहा को समझ पाते । वो कि हम -तुम, शायद! हो ही जाता कि सबके सामने वो लाश नहीं होती। नज़रि� read more >>
🪔 पहले वाली दिवाली 🪔 पहले जैसी बात अब नहीं रही, दिवाली भी अब कुछ खास नहीं रही। ओह... गुड़ के खिलौनों की खुशबू, अब मिठाई में भी वो मिठास न� read more >>
शायद! ज़िन्दगी की अहमियत, कुछ कर गुजरने के फैसले में ही हो। निहायत नेक विश्वासी बनने में ही हो। लेकिन कामनाओं का समुंद्र कहां, सांय भी read more >>
सुना हैं आज मेरे शहर में दिवाली हैं,। जश्न हैं दिन में, रात दिपो वाली हैं,।। मेरे आंगन मे भी दिप जलेगें मां ने कहां हैं पर साथ में यह भी क read more >>
""एक तेरे 👉🖊 कारण चुप हूँ मैं… वरना मुझे कौन-सा बोलना नहीं आता!" 😎🔥 ✍️— वीरपाल भुल्लर..🌺 read more >>
जो बीत गया, वह सपना था, जो आने वाला है, वह कल्पना है। पर जो पल अभी तेरे संग है, वही तेरी असली साधना है। भविष्य की चिंता में उलझकर, कई लोग आ read more >>
कई नज़रे इनके कई मुँह  बेशर्मों के कई रूप read more >>
किसी को कुछ मत बताना अपना समझकर लोग जान ही ले लेते है सबकुछ जानकर read more >>
उसने मुझे ये कहा, उसने उसे ये कहा, लोग यही कहते है, किसने किसे क्या कहा, उसने मुझे तुम्हारे बारे में ये कहा, उसने उसे तुम्हारे बारे में य� read more >>
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