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अपनी कुर्सी की खातिर कितनों को तुम कटवाओगे? लाल हरे में देश को बांटा, क्या तिरंगे को भी बटवाओगे? सुंदर गुलदस्ता है देश हमारा, क्या इसक� read more >>
हर किसी के पास मुकम्मल जहां नहीं होता, जो है मेरे पास वही बहुत है। सबके पास सब कुछ नहीं होता। खुश हूं मैं, मेरे पास कुछ तो है। कितनों क� read more >>
यह कैसा इश्क़ है, जो कहता है, तू और गहरे चल। मैं तुझे, तुझसे मिला दूंगा वादा रहा मेरा।। शरद भूषण मोंगरा read more >>
अगर वक़्त इंसान होता… अगर वक़्त इंसान होता, तो मैं उससे यूँ ही नहीं मिलता— मैं एक मुक़दमे की तरह उसके सामने अपना दर्द रखता। कहता— “� read more >>
तुझे भूल जाऊं ऐसा मेरे बस में कहां...!! पर तेरा साथ निभाऊं ऐसी मेरी तकदीर कहां..!! धन्यवाद🙏🏻 read more >>
किसी को इतना बदलने के लिए मजबूर मत करो कि जब तुम उसे पहले जैसा देखना चाहो तो उससे कभी मिल ही ना पाओ...!! धन्यवाद🙏🏻 read more >>
બુલેટ કરતાંય આ બેલેટ અનોખો મર્મ દઈ જાશે, સમય બદલાશે ને સત્તા તણો ગર્વ ઓગળી જાશે. ​નથી કોઈ જરૂરત હવે ઉઠાવવાની હથિયારો, આ આંગળીનો એક જ ટ� read more >>
ખૂબ સાદું છે આ જીવન, બસ વહ્યા જાવું તમે, કંઈક અખતરા કરો ને, કંઈક કરતા જાવ તમે. ​એક કોશિશ ના ફળી તો, ક્યાં અહી હારવાનું છે? જે સફળ અખતરો બન� read more >>
फिर नई सीख सी दे जाती है किताब तजुर्बा पुराना रखती है। शरद भूषण मोंगरा read more >>
જે નથી સ્વાધીન, એને છોડવાની વાત કર, હાથમાં જે છે, પ્રવાહ એ મોડવાની વાત કર. ​વ્યર્થ શું કાંટો ગણીને દોષ દેવો ભાગ્યને? મરુધરામાં પણ પ્રણ� read more >>
कौन सी कश्ती में सवार हूं मैं जाने जिंदगी कहां ले जा रही है दिन प्रतिदिन घटते जा रहे हैं हम उनके प्यार में इंतजार करते जा रहे हैं पत� read more >>
जिंदगी के हर पल को मुस्कुराते हुए जियो क्या रखा है रोने में गम के आंसू पीयो कभी तो दिन बदलेंगे इस विचार को मन में रखो किसी से उम्मी read more >>
"ये दिन-रात गुज़र रहे, वक्त पल-पल गुज़र रहे, देख जीवन की ये अनोखी लीला, ये तो बस श्वासों में गुज़र रहे! ​न कुछ ठहरता है यहाँ, न कुछ रुकता है read more >>
किसी ने हमसे कहा तुम हंसते बहुत हो..!! हमने भी कहा क्या करे रुलाने वाले बहुत है...!! धन्यवाद read more >>
*कविता* *आधुनिक शिक्षा* आधुनिक शिक्षा के कारण बच्चों का बचपन खो गया । ढाई साल में प्ले नर्सरी एडमीशन का चलन हो गया।। बच्चों को किड read more >>
नभ से उतरी सुरनारि हो, या कंचन की प्रतिमा कोई, शरद चंद्र की धवल धार, मृदु स्वप्नों में खोई खोई। मृग-शावक सी चंचल आँखें, कजरारे घेरों में read more >>
*कविता* *संतानों की सांसें है "मां*" मां ईश्वर है मां जननी है मां अनंत है मां अमृत है मां संस्कृति है मां ममता है मां संस्कार है मां � read more >>
बीते रे दिन-ओ-रैन, गया क्षण-क्षण ये जीवन, आती-जाती सांस में, छुपा बैठा है राम। ​खोया रहा तू उम्र भर, इस माया-नगर में, देखा न दिल को चीर कर, ज read more >>
जो तुमको सुननें लगे, मधुरिम अहद नाद‌। अंतर में कहने लगो, दाता अब तो जाग।। शरद भूषण मोंगरा read more >>
*टूटते रिश्ते बिखरते सम्बंध* पुराने समय में पत्रों में सबसे पहले *अत्र कुशल तत्रास्तु* लिखा जाता था इसका भावार्थ यह था कि हम यहां कुशल read more >>
तेरे जाने से ज्यादा तेरे बदलने का दुख है हमें..!! धन्यवाद read more >>
क्यों आखिर ....?? हम झूठी जिंदगी जीते हैं!! जबकि पता है हमें ... हमारे होने या ना होने से * किसी को फर्क नहीं पड़ता ...!! धन्यवाद read more >>
सुबह की पहली किरण जब, धरती पर मुस्काती है, थके हुए हर इंसान को, नई राह दिखलाती है। अंधेरों से घबराना क्या, रात तो ढल ही जाती है, सपनों क� read more >>
न कर्म का बंधन कोई, न अकर्म की दीवार हो, मिले जो सतगुरु के चरण, हम मृत्यु के उस पार हों। ​ये आना-जाना, जीना-मरना, खेल है इस 'भव' का बस, पकड़ ल� read more >>
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