ये जो चेहरे पे चमक है, ये सदा रहने की नहीं,
वक्त की लहर है साहब, ये रुकने की नहीं।
कांच के घर में रहकर पत्थर से मोहब्बत कैसी?
ये जो मिट्ट� read more >>
दुनिया को फतह करने का अरमान न पाल तू,
पहले अपने मन के अंधेरों को ढाल तू।
बाहर तो मिल जाएँगे लश्कर तुझे कई,
अंदर जो चल रही है, वो जंग संभ� read more >>
वो कहते हैं चमक देखो, दीवारों का निखार देखो,
इन सोने की सलाखों में, तुम शाही ठाठ-बाट देखो।
हर दाना है मोती जैसा, हर बर्तन है चांदी का,
पर म read more >>
उठो कि अब विश्राम नहीं,
रुकना तेरा काम नहीं।
समय की धारा को मोड़ दे तू,
हर पुरानी बेड़ियाँ तोड़ दे तू।
न हार का गम, न जीत का मोह,
बस कर्म मे� read more >>
हथेली की लकीरों में छुपा, कोई राज नहीं होता,
जो झुक जाए तकदीर के आगे, वो सरताज नहीं होता।
माना कि वक्त की लहरें, कभी विपरीत बहती हैं,
मगर � read more >>
न कोई चूक हुई मुझसे, न कोई अपराध किया,
फिर भी वक्त ने सजा सुनाई, ये कैसा न्याय जिया?
मैंने बोए थे फूल सदा, काँटों का उपहार मिला,
निर्दोष खड़ read more >>