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मिले हैं जख्म तो मरहम लगाना सीख लेंगे हम, हवाओं के रुख़ को खुद ही मोड़ना सीख लेंगे हम। ​अभी सूरज ढला है, रात की मुट्ठी में अंधेरा है, सह� read more >>
ये जो चेहरे पे चमक है, ये सदा रहने की नहीं, वक्त की लहर है साहब, ये रुकने की नहीं। ​कांच के घर में रहकर पत्थर से मोहब्बत कैसी? ये जो मिट्ट� read more >>
एक था दीया, एक बाती। जीवन रोशन करते, बन जीवन साथी। दीये हिये प्रेम से, लवलीन बाती। हवा हलराती बातें करती, आती-जाती। दीया हिये से उ� read more >>
दुनिया को फतह करने का अरमान न पाल तू, पहले अपने मन के अंधेरों को ढाल तू। ​बाहर तो मिल जाएँगे लश्कर तुझे कई, अंदर जो चल रही है, वो जंग संभ� read more >>
लिखने बैठूँ तो ज़माने भर के मंज़र कम हैं, मेरी आँखों में जो छुपे हैं, वो समंदर कम हैं। ​जिन्हें डर है कि बयाँ करने से शब्द घट जाएँगे, वो read more >>
रास्ते मुश्किल हैं तो क्या, इरादे फ़ौलाद रखते हैं, हम वो नहीं जो किस्मत के भरोसे हाथ मलते हैं। पसीने की हर एक बूंद से अपना कल लिखेंगे, कद� read more >>
वो कहते हैं चमक देखो, दीवारों का निखार देखो, इन सोने की सलाखों में, तुम शाही ठाठ-बाट देखो। हर दाना है मोती जैसा, हर बर्तन है चांदी का, पर म read more >>
आरव एक मध्यमवर्गीय परिवार का लड़का था। उसकी दोस्ती एक अमीर परिवार के लड़के, समर, से थी। वह खुद को बहुत भाग्यशाली मानता था कि उसे राह दि read more >>
उठो कि अब विश्राम नहीं, रुकना तेरा काम नहीं। समय की धारा को मोड़ दे तू, हर पुरानी बेड़ियाँ तोड़ दे तू। ​न हार का गम, न जीत का मोह, बस कर्म मे� read more >>
हथेली की लकीरों में छुपा, कोई राज नहीं होता, जो झुक जाए तकदीर के आगे, वो सरताज नहीं होता। माना कि वक्त की लहरें, कभी विपरीत बहती हैं, मगर � read more >>
न कोई चूक हुई मुझसे, न कोई अपराध किया, फिर भी वक्त ने सजा सुनाई, ये कैसा न्याय जिया? मैंने बोए थे फूल सदा, काँटों का उपहार मिला, निर्दोष खड़ read more >>
भणनो भौत आच्छी बात है, पण गुणनो बीं स्यूं भी आच्छौ। पढ़' रै मिनखपणो नीं आवै, बीं'सूं अणपढ़ गुंवार आच्छौ। - राधेश्याम जोशी कोहिणा read more >>
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